मोटापा आधुनिक सभ्यता की देन

मोटापा आधुनिक सभ्यता की देन माना जाता है । यह ऐसे लोगो का रोग है जिनके जीवन में परिश्रम का कोई स्थान नहीं है । भौतिक सुख -सुविधाओ के जाल में उलझकर लोग खान -पान,रहन -सहन और आचार -विचार की गलत आदतों के कारण मोटापे के रोगियों की तेजी से बढ़ती संख्या इस बात को दर्शाती है कि हम प्रकृति से दूर होते जा रहे है और हमारी जीवनशैली में नकारात्मक परिवर्तनों का प्रभाव बड़ रहा है । आज बच्चे,युवक, महिलाएं तथा प्रौढ़ सभी मोटापे से ग्रस्त नजर आते है । योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा के समन्वित प्रयोग से मोटापे को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है ।
                     लक्षण
मोटापे के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित है:
1. शरीर मोटा, भद्दा और बेडौल हो जाना (लंबाई और वजन के अनुपात में असंतुलन)
2.थोड़े से परिश्रम से ही थककर हाँफने लगना ।
3.अत्यधिक पसीना आना ।
4.शरीर के अंग -प्रत्यांगो में पीड़ा ।
5.आलस्य में वृद्धि ।
6.उत्साह में कमी ।
7.अधिक नींद आना ।
                       कारण
योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार मोटापा हमारी जीवनशैली में निरंतर हो रहे बदलावों का उप -उत्पाद है । इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित में से कोई भी हो सकता है -
पाचन संस्थान के विकार ।
∆परिश्रम का आभाव ।
∆ आलस्यपूर्ण तथा आरामतलब जीवनचर्चा ।
∆ व्यायाम का अभाव ।
∆भोजन में असंतुलन ।
∆गरिष्ट तथा तैलीय आहार का अधिक सेवन ।
∆बिना आवश्यकता के भोजन  करना ।
∆भोजन का समुचित स्वांगीकरण न होना ।
∆आनुवंशिकता ।
            कई बार कुछ दवाओ के सेवन से भी मोटापा बढ़ने लगता है । कुछ रोगियों में थायराइड ग्रन्थि के स्राव की अनियमितता भी मोटापे के कारण होती है । यही नहीं मोटापे की वजह से कुछ अन्य रोगों जैसे -उच्चरक्तचाप, हृदय रोग, संधिवात तथा मधुमेह होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है ।
          आजकल के तथाकथित फास्ट फूड और जंक फूड के अधिकाधिक प्रयोग से बच्चों में मोटापे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। टेलीविजन के सामने बैठे रहना तथा व्यायाम का अभाव एक बड़ा कारण है ।     
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स मोटापे  का  
             दूसरा नाम है 
 
अमेरिकन जनरल ऑफ न्यूट्रीशियन में प्रकाशित एक शोध में बताया गया है कि तथाकथित होई ग्लाइसेमिक फूड्स ब्रेन को इस तरह से प्रभावित करते है कि कुछ लोग ओवर ईटिंग के लिए प्रेरित होते है । यहां सवाल उठता है क्या सभी कैलोरी बराबर की बनाई गई है -नए अध्ययन की मानो तो एक महत्वपूर्ण मामले में यह बात सही नही है । इस शोध के मुताबिक शुगर युक्त आहार , पेय, व्हाइट ब्रेड और अन्य प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट्स,खाने की इच्छा ,फल से संबंधित हिस्से को खाने के लिए प्रेरित करते है । माना जाता है कि प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट्स में ब्लड शुगर को अचानक तेजी से बढ़ाने व गिरने की क्षमता होती है ।
               उपयुक्त प्रभावों के शिकार लोगो को रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स से बचे रहना चाहिए । इससे उनमें खाने की इच्छा कम होती है । इस तरह उन्हें वजन नियंत्रित करने में मदद मिलेगी । "इस शोध से मालूम होता है कि ब्रेन में पाचन क्रिया पर अपने प्रभाव के कारण सभी कैलोरी समान  नहीं होती है । हर व्यक्ति जो प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट्स खाता है ,उसे खाना खाने की अनियंत्रित इच्छा नहीं होती है  लेकिन जो लोग अधिक वजन से संघर्ष कर रहे है , खासकर हमारे आधुनिक वातावरण में और अपनी इच्छा पर नियंत्रित नहीं कर पाते है ,वे अगर रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन सीमित मात्रा में करेंगे तो उन्हे निश्चित रूप से लाभ होगा "।
             ब्लूडसुगर में वृद्धि करने के अलावा शुगर युक्त आहार ,जिनमे अधिक कैलोरी भी होती है ,वह ब्रेन के निश्चित क्षेत्रों में अजीब किस्म की प्रतिक्रियाएं करते है । इससे पहले किए गए इमेजिंग अध्ययनों से मालूम हो चुका है कि सब्जी व अन्य नीरस फूड्स खाने की तुलना में आनंद केंद्र चॉकलेट केक का एक टुकड़ा खाने पर अधिक चमक जाता है । यह सक्रियता पतले लोगो की तुलना मोटे व्यक्तियों के दिमाग में अधिक होती है । लेकिन सवाल यह है कि क्या मीठे डेजर्ट में हमारी दीर्घकालीन खानपान आदतों को बदलने की क्षमता होती है । इस बारे में सही जानकारी हासिल करने के लिए दर्जनभर व्यक्तियों को चुना और  उन्हे कई सप्ताह के अंतराल पर दो अलग -अलग अवसरों पर मिल्क शेक पिलाया । दोनो मामलो में मिल्क शेक एक ही तरह से बनाए गए थे यानी उन्हे दूध व वनीला से फ्लेवर्ड किया गया था । उनमें समान मात्रा में कैलोरी ,कार्बोहाइड्रेट्स ,प्रोटीन व फैट थे। लेकिन एक अवसर पर शेक होई ग्लाइसेमिक कोर्न सिरप से बनाया गया था और दूसरे अवसर पर लो ग्लाइसेमिक कार्बोहाइड्रेट्स स्तोत्र का प्रयोग किया गया था। यह परीक्षण दिखने व स्वाद में समान थे । वॉलिंटियर्स में किसी एक या दूसरे  शेक के प्रति प्राथमिकता नहीं थी । जैसा  कि उम्मीद थी ,हाई ग्लाइसेमिक मिल्क शेक में  ब्लडशुगर स्तर बहुत तेजी से बढ़ा लेकिन शोधकर्ताओं की विशेष दिलचस्पी यह जानने में थी कि इसके कुछ घंटे बाद क्या होता है -दरअसल वे जानना चाहते थे कि लंच तक  सभी वॉलिंटियर्स की स्थिति कैसी रहती है ? 
             शोधकर्ताओं ने पाया है कि हाई ग्लाइसेनिक शेक पीने के चार घंटे बाद ब्लूडशुगर स्तर हाइपोग्लाइसेमिक  रेंज में पहुंच गया था और वाउलेंटियर्स को ज्यादा भूख लग रही थी । ब्रेन स्कैन करने पर मालूम हुआ कि ब्रेन का वह हिस्सा जो इच्छा,फल व लत व्यवहार को नियमित करता है,उसमे अधिक सक्रियता थी । हालांकि वाउलेंटियर्स की संख्या काफी कम थी लेकिन प्रत्येक वाउलेंटियर ने एक सी ही प्रतिक्रिया व्यक्त की । साथ ही दोनो स्थितियों में ब्रेन के इन क्षेत्रों में रक्तसंचार में भी अंतर था ,जोकि काफी महत्वपूर्ण भी था । प्रतिक्रिया की क्षमता व निरंतरता की दृष्टि से देखा जाए तो इस अंतर का सहयोग होने की संभावना हजार में एक से भी कम थी । दूसरे शब्दों  में हाई ग्लाइसेमिक फूड्स का सेवन करने के कई घंटे बाद व्यक्ति की खाने की इच्छा बहुत बढ़ जाती है । वह ओवर ईटिंग करता,जिससे उसका वजन बढ़ जाता है । इसलिए वजन को नियंत्रित रखने में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स से बचे रहने में ही अक्लमंदी है ।
          ∆योगिक चिकित्सा 
मोटापे के नियंत्रण में योगिक चिकित्सा अत्यंत प्रभावी है । ऐसे रोगियों को कुंजल तथा शंकप्रशालन का अभ्यास करना चाहिए । ताड़ासन, कटिचक्रासन, पादहस्तासन, सर्वागासन, हलासन, भुजंगासन, धनुरासन, पश्चिमोत्तासन, मत्स्यासन,अर्धमत्स्येंन्द्रासन तथा उष्ट्रासन के साथ-साथ सूर्य नमस्कार का नियमित अभ्यास ऐसे रोगियों के लिए काफी लाभदायक है । सूर्यभेदी एवं भस्त्रिका प्राणायाम इस रोग के निवारण में अत्यनंत गुणकारी माने गए है । प्रातः काल तेज गति से टहलने के साथ रोगियों को अपनी दिनचर्या प्रारम्भ करनी चाहिए ।
     ∆प्राकृतिक चिकित्सा
मोटापे के रोगियों को चाहिए कि वे अपनी दिनचर्या में परिश्रम एवं व्यायाम को पर्याप्त स्थान दे । प्राकृतिक उपचार की दृष्टि से ऐसे रोगियों को मिट्टी की पट्टी, एनिमा,सप्ताह में एक-दो बार भापस्नान के साथ कटिस्नान के प्रयोग की सलाह दी जाती है । इसके अतिरिक्त समय - समय पर पूर्ण टब स्नान,धूप स्नान,गरम पाद स्नान तथा पूरे शरीर की मालिश का प्रयोग भी लाभदायक रहता है । तैरने से भी मोटापा घटाने में मदद मिलती है ।
             ∆आहार चिकित्सा
मोटापे को दूर करने की सबसे अच्छी चिकित्सा है भोजन काम और व्यायाम ज्यादा ।
                  इस सिद्धान्त के अनुसार ही मोटापे के रोगियों को अपनी दिनचर्या का निर्धारण करना चाहिए । मोटापे के रोगी को अपनी चिकित्सा रसाहार से प्रारम्भ करनी चाहिए । रसाहर के दिनों में एक ग्लास पानी में अंधे नींबू का रस मिलाकर दिन में तीन -चार बार पीना चाहिए। रसाहार करने के पश्चात एक सप्ताह  तक एक समय फलाहार एवं एक समय दलिया एवं सब्जी लेना चाहिए । इसके बाद मोटे चोकर सहित आटे की रोटी एवं उबली हरी सब्जी के सामान्य आहार पर आ जाना चाहिए । प्रत्येक पन्द्रह दिनों के अंतराल पर इस प्रक्रिया को दोहराते रहना चाहिए । ऐसे रोगियों को अपने आहार में फल,सब्जियों,सलाद एवं अमृताहार (अंकुरित अन्न -मूंग,मेथी,आदि )को प्राथमिकता देकर मिठाई और गरिष्ट एवं तैलीय चीजों का प्रयोग सीमित कर देना चाहिए । इन्हे यदि छोड़ा जा सके तो अति उत्तम होगा ।
                 मोटापा घटने  के इच्छुक व्यक्ति की आहार तालिका निम्नानुसार बनायी जा सकती है -
मोटापे के रोगी की दैनिक आहार तालिका 
प्रातः     - नींबू + एक गिलास गुनगुना पानी +2चमच शहद
नाश्ता   - अमृताहार (अंकुरित मूंग +मेथी) या मौसम का   
             कोई एक फल या फल का रस एक गिलास ।
दोपहर का -    मोटे चोकर सहित आटे की रोटी एक -दो ,
भोजन          उबली हरी सब्जी (लौकी,टिंडा,तोरई,परवल 
                   आदि) बिना मिर्च मसाला की,सलाद, छाछ
                   एक गिलास ।
सायंकाल  - नींबू +एक गिलास गुनगुना पानी +2 चमच 
                   शहद या सब्जी का सूप एक गिलास 
रात्रि का  - दोपहर की  तारह
भोजन
                 चिकित्सा में सावधानियां
1. योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के समन्वित प्रयोग से मोटापे को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है । आवश्यकता है अपने खान - पान ,रहन -सहन और सोच -विचार में सकारात्मक परिवर्तन लाने की।
2. प्रतिदिन खुली हवा में टहलना , योगाभ्यास,संतुलित और नियन्त्रित प्राकृतिक आहार एवं परिश्रम युक्त दिनचर्या मोटापे से मुक्ति के सहज और सरल उपाय है ।
3.चिकित्सा में बताए गए योगाभ्यासो एवं प्राकृतिक उपचारों का प्रयोग किसी कुशल योग व प्राकृतिक चिकित्सक के मार्गदर्शन में घर पर भी किया जा सकता है । पर उचित होगा कि पहले किसी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में कुछ दिन रहकर चिकित्सा कराई जाए ।
4. कई बार रोगी मोटापे के साथ कई अन्य विकारों जैसे दमा, मधुमेह, हृदय रोग तथा उच्च रक्तचाप आदि से भी ग्रस्त होता है । ऐसी स्थिति में चिकित्सक को उसकी पूरी जांच कराकर सावधानीपूर्वक उसका चिकित्सा एवं आहार क्रम बनाकर उसका पालन सुनिश्चित करना चाहिए ।
       प्रकाशित सामग्री का उद्देश योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में प्रयुक्त की जाने वाली आम विधियों की जानकारी देते हुए मोटापे के रोगियों को इन पद्धतियो की ओर उन्मुख करना है ।
        मोटापे के रोगियों को परामर्श दिया जाता है कि अपने लिए उपयुक्त चिकित्सा एवं आहार क्रम का निर्धारण किसी सुयोग्य प्राकृतिक चिकित्सक एवं योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में कराए ।
                                                  -Saloni Bhati.